मेरा open-minded परिवार-2

Family me chudai xxx story:- तो दोस्तों ये इस कहानी का दूसरा पार्ट है और उम्मीद करता हूं की ये सीरीज आपको अच्छी लग रही होगी. तो जैसा की आपने पढ़ा होगा की कैसे चाचू और चाची के बीच सेक्स की गर्माहट बढ़ने लगी थी और हमने पहली बार चाची की ब्लैक नेटेड पैंटी देखि. अब आगे-

मेरा open-minded परिवार-1

Family me chudai xxx story

तो करीब सुबह के 4 बजे रहे होंगे और चाची हमें उठाने लगी.

सोनिका: दिव्या बेटा कपिल चलो उठो.

दिव्या (आधी नींद में): मम्मी क्या हुआ?

सोनिका: अरे बच्चो आपको कपिल के रूम मे जाना होगा. यहाँ अभी थोड़ी देर में मेंटेनेंस के लिए कोई आने वाले है सो हमें बाहर जाना पड़ेगा.

कपिल: तो चाचा-चाची आप भी चलोगे न?

अभिनव: नहीं बेटा तुम लोग वह सो जाओ. और जैसे ही यहाँ का काम ख़तम होगा हम सुबह मिल लेंगे ब्रेकफास्ट पे. लेकिन तुम्हारी नींद बिगड़नी नहीं चाहिए न इसलिए.

सोनिका: ओके गाइस गेट उप.

दिव्या: मम्मी नींद आ रही है.

सोनिका: हां इसलिए तो वहाँ रूम में जा कर सो जाना.

तो उनके कहने के हिसाब से मैं इस वक़्त अपने कमरे में आ चुका था और मेरे पीछे दिव्या भी. चाची भी अंदर आयी और 2 मिनट मम्मी से बात करने लगी.

सोनिका: यार सविता कितने घंटे? हम लोग कब से वेट कर रहे थे.

सविता: अरे हम लोग आज एक एक्सपेरिमेंट कर रहे थे. एंड हम लोग ये 4-5 घंटे लगातार लगे रहे. हमने कुछ वाइल्ड वाले सेक्स वीडियोस देखे एंड वो करने का ट्राई किया. दीपक की तो आज सच में गांड फट गयी. उसका पनि कम से कम 10 बार निकला होगा।

चाची – सच मे? वो ठीक तो है ना? इतना पानी निकला जीजू का?

सविता: हां तो ये हर राउंड के बाद मेरा दूध पीते और फिर शुरू हो जाते. आज तो मज़ा ही आ गया. चल अब तेरी बारी एंड आल दी बेस्ट.

सोनिका: थैंक यू सो मच. अब बच्चो का ध्यान रखना.

सविता: यस तू टेंशन मत ले! बाय. हैव ए ग्रेट फ़क.

सोनिका: थैंक्स.

फिर चाची अपने कमरे में चली गयी और हम अपनी-अपनी जगह पे सोने चले गए. तो यहाँ भी कुछ पहले के जैसा ही था. बस दिव्या और मेरी पोजीशन इंटर-चेंज हो चुकी थी. मैं मम्मी के साइड वाली जगह पे सोया था और बाकी दोनों कॉर्नर्स पे पापा और दिव्या. फिर अब नींद तो उड़ ही चुकी थी. मैं बस यहाँ-वह पलट रहा था और सोने की कोशिश कर रहा था. दिव्या भी सो चुकी थी. फिर थोड़ी देर में मैंने नोटिस किया की मम्मी पापा भी अभी सोये नहीं थे. क्यूंकि हर थोड़ी-थोड़ी देर में बेड पे थोड़ी हलचल होती और मुझे पहले लगा की ये करवट ले रहे थे. लेकिन ऊपर मम्मी की नाइटी का जो शोल्डर के पास वाला स्ट्राप होता है वो उतरा हुआ था. क्यूंकि थोड़ी-थोड़ी देर में मम्मी हमारी तरफ घूमती और नीचे देखती की हम सो रहे थे न. उस वक़्त मैं आँखें बंद करता और फिर दोबारा नज़र मम्मी पापा की तरफ चली जाती.

मैंने नोटिस किया की ब्लैंकेट के अंदर मम्मी पापा के ऊपर सोई हुई थी. खैर उससे ज़्यादा तो क्या ही नज़र आ सकता था. अंदर तो पापा के शॉर्ट्स उतर चुके थे जो उन्होंने साइड में रख दिए थे. मम्मी ने तो जो नाइटी पहनी हुई थी जो कमर तक ऊपर थी और पापा की लुल्ली मम्मी की चूत में अंदर बाहर हो रही थी. मम्मी बीच-बीच में अपने बालों को पीछे करती और फिर दोनों हाथ पिलो के सपोर्ट से चुदाई करती. जैसे ही पापा का पानी निकल जाता, मम्मी अपनी जगह पर लेट जाती और दोनों एक-दुसरे को देख कर मुस्कुराते. फिर मम्मी एक बार हमें देखती की हम जाग तो नहीं रहे थे.

उसके बाद जैसे ही मम्मी दूसरी तरफ घूमी, तो ब्लैंकेट थोड़ी साइड हो गयी. तब मैंने पहले बार मम्मी की गांड देखि. मैंने सोचा मम्मी ने भी सोनिका आंटी की तरह पैंटी उतार दी होगी रात में सोते वक़्त. लेकिन नाईट लैंप में इतना क्लियर तो कुछ भी नज़र नहीं आता. बस हल्का-हल्का सा दिखा जिसे देख कर मैं काफी हैरान था. खैर उसके बाद मुझे तो याद नहीं की मैं कब सो गया.

अगले दिन हम सब उठे और फ्रेश हो कर तैयार होने लगे. फिर नीचे ब्रेकफास्ट रूम में मिले. मैं और दिव्या तो बाहर थे. अंदर बाकी सब बड़े लोग बात कर रहे थे.

सविता: तो सोनिका भाभी? कैसी रही रात? कितनी बार और कैसे मज़े किये?

सोनिका: अरे आराम से सविता. सब जानना है?  वैसे मज़ा तो काफी आया. हमने तो रूम की हर जगह सेक्स किया. पहली बार इतने सालों में मुझे बहुत मज़ा आया. जैसे ही मैंने इन्हे बताया की दीपक भाई ने 10 बार पानी निकाला तो आपको कम से कम 15 बार निकालना पड़ेगा.

सविता: फिर? जीजू आपका क्या हाल है? लग तो रहा है की आप लोग सोये ही नहीं होंगे 1 मिनट के लिए भी.

अभिनव: नहीं सविता इतने सालों बाद ऐसा मौका मिला था. वरना बच्चो और काम से तो फुर्सत ही कहा मिलती है. सोये तो नहीं लेकिन मज़ा काफी किया.

सोनिका: हां लेकिन 15 बार तो नहीं. मैंने 12 बार पानी निकाला इनका. लेकिन पहले 4 बार में फुल फव्वारा निकला. उसके बाद तो बस बूँद-बूँद ही निकला.

अभिनव: हां तो भाभी गन्ने का जूस थोड़ी है की हर बार पानी निकलता ही जायेगा.

दीपक: वही तो 3-4 बार में जितना निकलना हो पानी निकल जाता है.

सोनिका: वैसे पता है. कल जब बच्चे सोये हुए थे तो मेरी पैंटी नीचे गिर गयी थी. और दिव्या पूछने लगी क्या हुआ और सब. लेकिन मैंने बात की घुमा दिया. तुम्हे नहीं लगता बच्चो के मन में काफी डॉब्टस होंगे.

सविता: हां मुझे भी ऐसा लगा की शायद बच्चे सोये नहीं है और बस नाटक कर रहे थे. लेकिन हम तो सेक्स की भूख में इतने मगन थे की फर्क ही नहीं पड़ता.

सोनिका: तो फिर आज का क्या प्लान है?

सविता: हां आज तो आखरी नाईट है हमारी यहाँ.

सोनिका (अभिनव चाचू को): सुनिए न क्या हम हर बार की तरह यहाँ भी?

अभिनव – शॉक होते हुए की दीपक और सविता के सामने): पागल हो गयी हो क्या? ये बात यहाँ करने की क्या ज़रुरत है?

सविता: क्या मतलब? कैसी बात?

सोनिका: अरे बताते है न. क्या पता इन्हे भी इंटरेस्ट हो तो ये भी मज़े कर सकते है न.

दीपक: भाभी अगर सेक्स में और मज़ा आने वाली बात है तो ज़रूर बताये. भैया इसमें क्या?

सोनिका: वो दरअसल हम लोग कुछ साल पहले जब घूमने जाते थे न तो हम वह एक होटल में रुकते थे. वहाँ कपल्स पार्टनर्स स्वैप करते थे. तो हम दोनों दुसरे कपल्स के साथ मिल के सेक्स करते थे. जस्ट टू एक्सपीरियंस चेंज.

सविता: फ़क क्या बात कर रही हो भाभी. एंड आप दोनों एक-दुसरे की बीवी पति के साथ सेक्स?

सोनिका: यस! एंड यू नो, जब एक साथ तुम्हे दो अलग-अलग लंड मिले न तो मज़ा भी दुगना हो जाता है.

सविता: हमने तो कभी ऐसा सोचा ही नहीं. क्यों दीपक? आईडिया तो बुरा नहीं लगा मुझे. लेकिन मैं जानती हूं की आप अगर राज़ी न हो तो कोई बात नहीं. मैं समझ सकती हु.

दीपक: वैसे अगर तुम्हे ट्राई करना है तो हम कर सकते है. लेकिन पूरी प्रोटेक्शन के साथ.

सविता: लेकिन सोनिका यहाँ हम दुसरे कपल्स कैसे ढूंढें?

सोनिका: हां ये बात तो है.

अभिनव: हम तो ऐसी जगह आये है जहा कोई क्लब्स वगैरा भी नहीं, आस-पास जहा हम जा कर ट्राई कर सके.

सोनिका: आईडिया! देखो आप दोनों को भी स्वैपिंग करना है और हमें भी. क्यों न हम आपस में ही करे?

सविता: सोनिका मैं जीजू के साथ? कैसा लगेगा? और परिवार में चुदाई. मुझे सही नहीं लग रहा.

सोनिका: यार ये भी तो नया एक्सपीरियंस होगा. हमें एक्स्प्लोर करने मिलेगा. और ये सोचो हम तो सब एक-दुसरे को जानते है. इतनी ही बातें होंगी उतना ही मज़ा भी।

दीपक: वैसे भैया आपका क्या ख़याल है? मुझे समझ नहीं आ रहा. सोनिका का आईडिया है तो वो तो राज़ी है. बाकी सविता तुम बताओ. करना है?

सविता: कोशिश कर सकते है जीजू.

सोनिका (एक्साईटमेंट में): फ़क यस! सो आज रात होगी हमारी सबसे लम्बी और मज़ेदार रात.

सविता: और बच्चे?

सोनिका: मैं तो सोच रही हूं बच्चो को भी साथ रखते है. आफ्टर आल हम बात कर रहे थे न सेक्स एजुकेशन की. मुझे लगता है उन्हें वो ज़रूरी है. और इस उम्र में मिलनी चाहिए उन्हें.

सविता: वरना आगे जा कर अनजाने में कोई गलती न कर बैठे. यही तो उम्र है बनने की या बिगड़ने की.

अभिनव: यू मैं तो से हम स्वैपिंग भी करेंगे और वो भी बच्चो के सामने?

सविता: यस जीजू.

दीपक: चलो अब बच्चो की माँ को लगता है तो यही सही. लेकिन आज दिन में फिर आराम कर लेते है. पूरी रात तो सोये नहीं.

सविता: यस एक्चुअली. पूरी रात इनका लंड खड़ा रखना है तो अभी रेस्ट देना पड़ेगा न.

सोनिका: यस यस दीपक भाई रेस्ट कर लीजिये. क्यूंकि रात को मैं थकाने वाली हूं आपको.

अभिनव: अरे तुम क्या थकाओगी. हम दोनों मिल कर तुम दोनों की लेंगे फिर तो बारी-बारी.

दीपक: यस अब आएगा न मज़ा. चले अब?

फिर हम सब रेस्ट करने चले गए अपने-अपने कमरे में. तो दोस्तों आपको यहाँ तक की कहानी कैसी लगी मुझे कमैंट्स करके ज़रूर बताये.

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