मेरा 18वां बर्थड़े गिफ्ट पापा का लंड -1
Papa ne Beti ko choda kahani:- हेल्लो दोस्तों!! मेरा नाम नीता है और मेरी उम्र 20 साल है। मै आपको आज अपनी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ। दोस्तों ये कहानी मेरे और मेरे पापा की है। आज मै आपको अपनी पूरी सच्चाई बताऊँगी कि कैसे मेरे पापा ने मेरी कुँवारी बुर से खून निकाला और मुझे जमकर पेला। तो मै आपको अपने पापा के बारे मे बता दूँ। मेरे पापा का नाम हरिश्चंद्र, उम्र 42 और माँ का नाम लक्ष्मी है। हम मुंबई में रहते थे। दोस्तों ये बाप बेटी की चुदाई की कहानी मेरे और मेरे पापा के बीच हुई चुदाई की है। ये कहानी पढ़कर आपको मज़ा ना आया तो मेरी चूत मे अपना लंड पेल देना, मै कुछ नही बोलूंगी और कभी दोबारा कहानी नहीं लिखूँगी। तो चलिये आपका ज्यादा टाइम वेस्ट ना करते हुए कहानी शुरू करते है।
ये कहानी तब की है जब मेरी माँ का बच्चेदानी हटाने का ऑपरेशन हुआ था। डॉक्टर की लापरवाही से माँ के पूरे शरीर मे फालिश मार गयी था। माँ को इस हालत में देख के पापा बहुत रोये थे। उन्होंने डॉक्टर पर केस भी किया और कोर्ट से हम जीत भी गए। माँ को बहुत से डॉक्टरों को दिखाया मगर माँ की हालत नहीं सुधरी। हमने उनके लिए एक मेड रख दी, जो उनके सारे काम करती थी। बेड पर ही बैठे बैठे वो सुसु पॉटी करती थी। मेड ज्यादा काम करती थी। कभी कभी पापा या मुझे भी साफ़ करना पड़ता था। पापा का पोजीशन सबसे ख़राब रहता था। उन्हें ऑफिस भी देखना पड़ता था और घर भी। माँ भी पापा के साथ रोती थी। सच कहु तो पापा की सेक्स लाइफ भी खत्म हो गयी थी, क्युकी डॉक्टर ने मना किया था कि माँ की कमर पर कोई भी प्रेशर नहीं पड़ना चाहिए, वरना उनके प्राण भी जा सकते है। वैसे भी माँ को कमर के नीचे कोई एहसास नहीं रहता था।
फिर दिन बीतते गए। मैं बड़ी होती गयी। पापा मुझे अक्सर अपने बदन से लगा के शाबासी देते थे। पहले मुझे अच्छा नहीं लगता था, मगर धीरे धीरे मैं भी एन्जॉय करने लगी। पापा मुझे प्यार करने के बहाने अपने छाती से लगाते और मेरा कोमल जवान चूचि दबा देते। कभी मेरे पीछे खड़े हो कर अपना खड़ा लंड मेरे चूतड़ से सटाने लगते। कभी मेरे झुकने पर मेरा छाती देखने लगते। कभी मुझे जोर से भींच लेते, जिस से मेरे कश्मीरी सेब जैसी खड़ी चूचियाँ पापा के सीने से जा चिपकती। ऐसा करने से मुझे बहुत मजा आता, शायद पापा को भी मज़ा आता होगा, इसीलिए वो भी मुझे अक्सर जोर से भींच लेते और मै कसमसा कर रह जाती। मगर उस उम्र में जब चूचि जवानी की दहलीज पर कदम रखते हुए बड़ा हो रहा हो, तब कोई उसे छुए या दबाये तो कितना मीठा दर्द भरा मज़ा आता है ये एक लड़की ही बता सकती है।
कभी कभी मैंने ये भी महसूस किया की पापा मुझे नहाते वक़्त खिड़की से देखने की कोशिश कर रहे हो, मगर मैं कभी उन्हें ऐसा करते पकड़ नहीं पायी। पापा जब ये हरकत करते तो मुझे पता नहीं क्या हो जाता था। मै चाह कर भी उन्हें मना नहीं कर पाती थी। मगर बाद में मुझे खुद पर और पापा पर बहुत गुस्सा आता था। अब ये सारी हरकते मुझे नागवार गुजर रही थी। फिर मैंने एक दिन माँ से सब कह दिया।
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मै – माँ पापा मुझे बहुत गंदे तरीके से छूते हैं, मुझे अच्छा नहीं लगता। लेकिन सच कहूँ तो मुझे भी अच्छा लगता था, जब वो ऐसा करते थे।
माँ ने कहा – बेटी उनसे नफरत न कर! देख वो हमारे लिए इतना कर रहे है! अगर उन्होंने दूसरी शादी कर ली तो तुम कहाँ रहोगी और मैं कहाँ रहूंगी? उनका मन भी तो बेचैन होता होगा! मगर मैं उनकी इच्छा पूरी नहीं कर सकती! जल्दी से तेरी शादी हो जाये और तू ससुराल चली जाये बस यही दुआ है। मगर बेटी तू कुछ ऐसा न करना की बदनामी हो।
इसका असर ये हुआ की मैं भी चुपचाप कर के पापा के टच का मज़ा लेने लगी। वो मुझे अपने गोद में बैठाते और मुझे उनका खड़ा लंड जो मेरी गांड में चुभता था बहुत अच्छा लगता। वो बात करते करते मेरी छाती छू देते और हल्के से दबा देते थे। मेरा बदन गनगना जाता था। मैं भी कभी कभी उनका लंड दबा देती जैसे गलती से छुआ हो। पापा कभी टॉयलेट से बिना टॉवल के नंगे निकल जाते, जिसे मैं देख के भाग जाती मगर उनका खड़ा लंड मुझे अक्सर याद आता रहता। वैसे माँ तो अक्सर बेड पर ही पड़ी रहती, जिसका फ़ायदा हम बाप बेटी जम कर उठा रहे थे। वक्त गुजरता गया और मै अट्ठारहवें साल में कदम रखने वाली थी और उस दिन मेरा अट्ठारहवाँ जन्मदिन था और उस दिन पापा ने ग्रैंड पार्टी का प्रॉमिस किया था।
उस दिन ऐसी घटना हुई जिसने मेरा जीवन ही बदल दिया। मै पापा का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी। शाम को 8 बजे डोर बेल बजी। मै दौड़कर दरवाजा खोली और हमेशा की तरह पापा से लिपट गई, पापा ने भी मुझे चिपका लिया। मै पापा से लिपट कर नखरा कर बोली..
मै – पापा इतनी देर क्यों कर दी? जाइये मै आप से नहीं बोलती।
पापा मेरी चुतड पर थपकी मारकर बोले – मेरी रानी बिटिया तो नाराज़ हो गई लो अभी नाराज़गी दूर किए देता हूँ।
और उनके एक हाथ में जो पॉली बैग था मुझे दिखा कर बोले
पापा – देखो तो क्या लाया हूँ तुम्हारे लिए!!
मै खुश होकर पापा को चूम ली और जोर से लिपट कर बोली – पापा आप कितने अच्छे है।
मै बैग खोलने लगी तो पापा बोले – अभी नहीं खोलो इसमें तेरा ड्रेस है इसे पहन कर जन्मदिन का केक काटना। ये तेरा जन्मदिन का गिफ्ट है और हाँ माँ को मत बताना के मै लाया हूँ। तुम रोज़ रोज़ 18 साल की तो नहीं होने वाली।
मै बोली – ओह पापा केवल ड्रेस? मेरा खिलौना नहीं लाये?
पापा ने गहरी नज़रो से मुझे देखा और चूतड़ को अपने तरफ दबा कर मुझे अपने साथ सटाया! मेरी जांघ पापा की जांघो से चिपक गई। हमेशा की तरह मेरी चूत पापा के लंड से जा टकराई!! मेरी आँखों मे आंखे डाल पापा धीरे से बोले..
पापा – कुछ ही देर बाद तू 18 की हो जाएगी। तू तो अब जवान हो गई है खिलौने से तो बच्चे खेला करते है।
मै ठुनक कर बोली – तो मै किस से खेलूंगी?
पापा मेरी गांड पर थपकी मारकर बोले – चिंता क्यों करती है मै हूँ न!! मेरे पास है तुम्हारे लिए एक खिलौना। चलो देर हो रही है तुम जल्दी से खाना बनाओ, 8 बज गए, 10 बजे केक काटना है।
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मै किचन में चली गई, थोड़ी देर बाद पापा किचन में आए और मेरे पीछे सट कर खड़े हो गए। मै थोड़ा झुक कर सब्ज़ी काट रही थी, मेरी गांड बाहर की ओर उभरी हुई थी । मै पापा का लंड गांड के दरार पर महसूस कर लहरा गई। ये पहली बार नहीं था, ऐसा अक्सर होता था। जब मुझे लगता था के पापा किचन में आ रहे है तो मै जान बूझ कर पहले से ही झुक जाती, ताकि पापा को अपना लंड मेरी गांड पर सटाने में आसानी हो। मुझे भी पापा का लंड जो रोटी बेलने वाला बेलन जैसा लम्बा मोटा था, खूब मज़ा देता था। हाँ तो पापा लंड को मेरी गांड में सटाकर बोले..
पापा – मै बाथरूम जा रहा हूँ खाना लगा देना।
मैंने देखा पापा के हाथ में टॉवल साबुन के इलावा एक छोटा सा डब्बा भी था।
पापा – आराम से बनाओ खाना बाथरूम में थोड़ा लेट होगा।
ये कह कर पापा चले गए। आधा घंटा के बाद पापा बाहर आए और बोले..
पापा – जाओ जल्दी से नहा धो कर नया वाला ड्रेस पहन लो।
मैंने अंदर जा कर पहले बैग खोला, देख कर लाज भी आई और पापा पर प्यार भी! बैग मे मिनी स्कर्ट और शर्ट के इलावा एक सादा रंग का पैंटी भी था। मै शावर के पास गई, तो उसी डब्बे पर नज़र गई। उत्सुकता वश उठा कर देखा जब पता चला तो मै सनसना गई। वो बाल साफ करने का क्रीम था जो आधा खाली था। ये सोच कर सनसना गई के पापा ने अपना झांट साफ कर चिकना कर लिए है। अब मै समझी के पापा ने क्यों कहा था के देर होगी। मेरी चूत पर भी घने बाल उगे थे, क्यूंकी कभी साफ नहीं किया था। सोचा क्यों ना मै भी साफ कर लूँ। मैंने भी बाल साफ किए और जब बाल साफ हो गए, तो मेरी चूत खिल उठी। चूत पूरा पाव रोटी की तरह फूली हुई थी, जो पहले बालो में छुपी होने के कारण दिखती नहीं थी।
पापा ने बेटी को चोदा कहानी
मै नहा कर कपडा पहनने लगी तो पाया कि पैंटी बहुत छोटी थी, यानि गांड का ऊपर का कुछ भाग खुला रह गया। शायद पापा पहली बार लाये थे, इसलिए साइज मालूम नहीं था। उस पर मिनी स्कर्ट डाला और फिर शर्ट पहन लिया। शर्ट में प्रेस बटन था, पहनने में आसानी हुई। तभी पापा की आवाज़ सुनाई दी कितना देर लगा दी?
मै अंदर से ही बोली – हो गया पापा आती हूँ!
तो पापा बोले – ठीक है तुम ऊपर वाले रूम में चली जाना तुम्हारा केक वही रखा है। मै तेरी मम्मी को नींद का दवा खिला कर आता हूँ।
मै ऊपर छत पर कमरे में गई वहाँ का बल्ब ऑफ था, बस एक मोमबत्ती जल रही थी। मै समझी के इस रूम का बिजली ख़राब है इसलिए पापा ने कैंडल जलाया होगा। रोशनी इतनी कम थी, कि कुछ भी साफ दिखता नहीं था। पापा ने सारा इंतज़ाम कर रखा था टेबल पर 18 कैंडल सजा रखी थी। तभी पापा अंदर आये। मैंने देखा ये क्या पापा का बदन तो नंगा था, बस एक पतला सा गमछा कमर में लपेट रखा था। जो सामने से कुछ उठा था। मै जान गई वो पापा का प्यारा लंड था जिसमे हल्का तनाव आया हुवा था। पापा ने मुझे अजीब नज़र से देखा और पास आकर बोले..
पापा – ओह गॉड मेरी नीता तो दुनिया की सबसे सुन्दर लड़की है।
मै शर्मा कर पापा से लिपट कर बोली – पापा भी तो सब से अच्छे है!
पापा का हाथ जहां जाना था जा चूका था। पापा अपने हाथ से मेरा कड़क चूचि दबाने लगे। मेरे मुंह से सिसकारी निकल गयी, जिसे पापा ने भी सुन लिया। वह मन ही मन खुश हो गए क्यूंकि उन्हें ये अहसास हो गया की मैं भी अब उत्तेजित हो जाती हूँ। मगर इस बार तो पापा हद से आगे बढ़ गए। पापा अपना हाथ मिनी स्कर्ट के नीचे से अंदर कर पैंटी पर ले आये। जैसे ही उनका हाथ पैंटी के ऊपर खुली गांड पर गया, मै सिहर उठी जिससे पापा ने भी महसूस किया। पापा का लंड जो मेरी चूत पर सटा था, उसने हल्की सी हरकत की। पापा ने पैंटी के इलास्टिक को ऊपर करने की कोशिश की और बोले।
पापा – अरे ये तो छोटी पड़ गई। नीता तुमने बताया क्यों नहीं की ये छोटी है। कोई बात नहीं उतार दो कल चेंज कर देंगे।
मै सिहर कर बोली – उह पापा कल उतारूंगी!
तो पापा पैंटी के अंदर ऊँगली को गांड के दरार में दबा कर बोले – नही नहीं कुछ लग जायेगा तो ख़राब हो जायेगा।
पापा ने तो कई बार कपडा के ऊपर से दरार पर ऊँगली चलाया था। आज पहली बार गांड के अंदर ऐसा किया। मेरी गांड में सिकुड़न हुई और पापा ऊँगली पैंटी में फंसा कर नीचे कर बोले..
पापा – इसे बाहर करो!!
मैंने पैंटी को बाहर किया तो पापा हाथ में लेकर देखा की चूत के पास का कपडा थोड़ा भीगा हुआ था। वो पैंटी को नाक के पास ला कर सूंघने लगे और बोले..
पापा – ये गीला कैसे हो गया रानी बिटिया?
मैं शर्म से लाल हो गयी। जिसे देख कर पापा मुस्कुराए और मुझे टेबल के पास खड़ा कर मेरे पीछे आए और बोले..
पापा – कैंडल जलाओ!!
बाप बेटी की चुदाई की हिन्दी कहानी
मै झुक कर एक एक कर कैंडल जलाने लगी। पापा को जैसे इसी का इंतज़ार था। मेरे झुकते ही मेरा मिनी स्कर्ट पीछे से उठ गया और पूरा नंगा चूतड़ पापा के सामने आ गया। पापा मेरी गांड से सट गए। अंदर तो मै नंगी थी ही। पापा का लंड और मेरी चूत में केवल एक पतला गमछा का पर्दा था। मुझे लगा की चूत से कुछ रिस कर बाहर आ रहा था। मेरा हाथ कांपने लगा। मै किसी तरह कैंडल जलाई। 18 कैंडल जलने पर कुछ रौशनी हुई।
पापा मुझे छुरी दे कर बोले – नीता अब तुम कुछ ही पल में 18 साल की होकर जवान हो जाओगी। चलो कैंडल को जोर से फूँक मारकर बुझाओ।
जब पापा ने कहा की फूँक मारकर कैंडल बुझाओ तो मुझे फिर आगे झुकना पड़ा। मेरा रोम रोम सिहर रहा था। पता नहीं अब क्या होगा। इच्छा हुई वहां से भाग जाऊ मगर पैर थे जो हिलने को तैयार नहीं हुए। इसी उधेड़ बुन में मै जान बूझकर अपने पैरो को थोड़ा फैला कर झुकी। मै पापा को पूरी जगह देना चाह रही थी। पापा कोई बच्चा तो थे नहीं। उनको भी पता था के मै क्या चाहती हूँ। पापा अपने खड़े लंड को नीचे झुका कर मेरी चूत पर लगा कर बोले..
पापा – आराम से एक एक कर बुझाओ।
मै एक एक कर कैंडल को फूँक से बुझाने लगी। उधर पापा अपने गमछा को, जो उनके लंड और मेरे चूत के बीच पर्दा बना था धीरे धीरे सरकाने लगे। मेरी तो साँस ही रुक गई। मेरा ध्यान उधर न जाये इसके लिए पापा बार बार बोलते रहे..
पापा ने चुदाई करके दिया जन्मदिन का गिफ्ट
पापा – ठीक है सबपे जोर से फूँक मारो!!
और धीरे धीरे कपडा हटाते रहे। तभी मैंने महसूस किया के मेरी चूत पर गरम लोहा सट गया। मेरी चूत जोर से चुनचुनाने लगी। पापा लंड को चूत की दरार पर एडजस्ट कर बोले..
पापा – क्या हुवा नीता बुझाओ ना!
मेरी तो सांसे ही उखड़ने लगी! मै थोड़ा हाँफते हुवे चूतड़ को लंड पर ठेल कर बोली..
मैं – हाँ पापा नहीं बुझता है!
तो पापा बोले – अच्छा लाओ मै ही बुझा देता हूँ!
पापा मेरी चूत के पास जांघो पर हाथ रख कर मुझ पर झुक गए और कैंडल पर फूँक मारने लगे। तभी मेरी साँस फिर से उखड़ने लगी, ऐसा लगा जैसे चूत पर किसी ने गरम रोड रख दिया हो। मैंने महसूस किया की पापा का लंड मेरे चूत के मुंह पर आ गया है। मुझे लगा की मेरी चूत का मुंह खुल रहा है। ये सच था क्यूंकी पापा की दोनों हाथो की उँगलियाँ चूत के किनारे पर थी और वो चूत फैला रहे थे। मैं अपने आपे से बाहर होने लगी। पापा भी आज हद से बाहर हो रहे थे। मुझे लगा अगर उन्हें अभी नहीं रोका गया तो मामला बहुत आगे बढ़ जायेगा। यानी आज मेरी चुदाई निश्चित है। मैं अभी चुदवाना नहीं चाहती थी कम से कम शादी तक कुंवारी रहना चाहती थी। मगर मेरा शरीर मेरा साथ नहीं दे रहा था। मेरी चूत से पानी बहने लगा था। मन मुझे रोकना चाहता था मगर बदन और ही कुछ चाहता था।
आगे की कहानी अगले पार्ट मे — मेरा 18वां बर्थड़े गिफ्ट पापा का लंड 2
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